मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह : हाथ कङ्गन को आरसी क्या

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17.3.04

हाथ कङ्गन को आरसी क्या

पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या। यह कहावत कम से कम इन लोगों पर तो सही बैठती है।
12:10 बजे आलोक द्वारा।
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