मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह : आपकी सेवा में, अब दो तरह से

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18.3.04

आपकी सेवा में, अब दो तरह से

लिनक्स वाले स्थल तो बहुत अनुवादित किए, अपने चिट्ठे भी बनाए। पर कुछ जालस्थल जो मुक्त नहीं हैं, वे कैसे हिन्दी में आएँगे? तो प्रस्तुत है यह सेवा। यदि आप किसी को जानते हैं जो कि अपने स्थल अनुवादित करवाने में दिलचस्पी रखते हैं, तो ज़रूर लिखें। हाँ स्वयंसेवी कार्य तो अलग चलता ही रहेगा, फ़िलहाल मेरी नज़र है लाइव्जर्नल के हिन्दी अनुवाद पर, कोई और शामिल होना चाहे तो काम में दिलचस्पी बढ़ेगी। इसके लिए लाइव्जर्नल के ब्रॅड को डाक भेजनी होगी। तो यदि आप की दिलचस्पी अब भी हो तो ज़रूर लिखें।
01:14 बजे आलोक द्वारा।
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