मानना पड़ेगा काठमण्डू के मदन पुरस्कार पुस्तकालय को, जिन्होंने तीन तीन देवनागरी की मुद्रलिपियाँ तैयार की हैं। एक नमूना, काञ्जिरोबा मुद्रलिपि का।
इसके अलावा वे कालीमति व थ्याका रबिसन मुद्रलिपियाँ भी बना चुके हैं। जय नेपाल।
09:36 बजे आलोक द्वारा।
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