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24.6.04

लाहौल विला कूव्वत, मुनीश साहेब की बदौलत

ख़ाक, हसरत, ज़ख्म, दरिया, इत्तेफ़ाक, इख़्लास, इब्तदा इनमें सात में से कमसकम चार लफ़्ज़ों के मायने मालूम हों तो ज़रा अपने इबसिरात के मोती बिखेर आएँ।
22:15 बजे आलोक द्वारा।
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