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23.12.04

एक दिन में एक शेयर

यह पसन्द आया, अपनी बत्ती लगने के बारे में : ये धुआँ कम हो तो पहचान हो मुमकिन, शायद यूँ तो वो जलता हुआ, अपना ही घर लगता है
18:29 बजे आलोक द्वारा।
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Blogger Atul Arora ने अर्ज़ किया है...
जनाब नसरूद्दीन पान की दुकान पर पान खा रहे थे कि पंडित बैजूनाथ चिल्लाते हुए आये
"आग लग गयी मोहल्ले में, और तुम चैन से पान खा रहे हो"
जनाब नसरूद्दीन ने कहा "मैनू की?"
पंडित बैजूनाथ चिल्लये "अरे तेरे घर में भी लगी है आग!"
जनाब नसरूद्दीन ने कहा "तैनू की?"
नोट: अगर पंजाबी का प्रयोग कुछ गलत हो गया हो तो आलोक या पंकज ठीक कर दें कृपया|
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