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13.9.05

अतीत

अतीत सुहाना लगता है। -- अनूप कुमार शुक्ला, गूगल टॉक पर
13:00 बजे आलोक द्वारा।
4 छींटाकसी
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4 छींटाकसी -
Blogger Jitendra Chaudhary ने अर्ज़ किया है...
ई का है?
ये तो टेलीग्रामिया से भी आगे की पोस्ट दिखत है
Anonymous Anonymous ने अर्ज़ किया है...
किसका अतीत? वो डाक-तार विभाग का ७५ पैसे प्रतिशब्द की दर से टेलिग्राम भेजने वाला अतीत या कानपुर से दिल्ली ट्रंक-काल बुक कराने वाला अतीत(!?)

आलोकजी आप शीर्षक मे ही पोस्ट लिख दिया कीजिए! मुझे तो यूं भी आपकी वन लाईनर छायावादी पोस्ट्स समझ आती नही! खीज जरूर होती है!
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
शीर्षक मे ही पोस्ट लिख दिया कीजिए

सुझाव अच्छा है।

समझ आती नही

समझने के लिए अधिक नहीं है, जो लिखा है, वह आपको प्रविष्टि में मौजूद कड़ी तक ले जाने के लिए बहाना मात्र है।

हुआ यूँ कि फ़ुरसतिया जी ने इसके पहले मेरा पुराना चिट्ठा नहीं देखा था, फिर उन्होंने कहा कि उन्हें पढ़ के अच्छा लगा। फिर मैंने भी कहा कि मुझे भी वह चिट्ठा पढ़ के अच्छा लगता है।
तभी उन्होंने कहा कि अतीत सुहाना लगता है।

पर ये जान के खुशी हुई कि आप मेरी प्रविष्टियों मे गूढ़ अर्थ ढूँढते हैं। :)
Blogger Raman Kaul ने अर्ज़ किया है...
ब्लॉग पर चिट्ठी को चिट्ठा कहते हैं, तो ब्लॉग पर तार को क्या कहेंगे? तारा?
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