समझने के लिए अधिक नहीं है, जो लिखा है, वह आपको प्रविष्टि में मौजूद कड़ी तक ले जाने के लिए बहाना मात्र है।
हुआ यूँ कि फ़ुरसतिया जी ने इसके पहले मेरा पुराना चिट्ठा नहीं देखा था, फिर उन्होंने कहा कि उन्हें पढ़ के अच्छा लगा। फिर मैंने भी कहा कि मुझे भी वह चिट्ठा पढ़ के अच्छा लगता है। तभी उन्होंने कहा कि अतीत सुहाना लगता है।
पर ये जान के खुशी हुई कि आप मेरी प्रविष्टियों मे गूढ़ अर्थ ढूँढते हैं। :)
ये तो टेलीग्रामिया से भी आगे की पोस्ट दिखत है
आलोकजी आप शीर्षक मे ही पोस्ट लिख दिया कीजिए! मुझे तो यूं भी आपकी वन लाईनर छायावादी पोस्ट्स समझ आती नही! खीज जरूर होती है!
सुझाव अच्छा है।
समझ आती नही
समझने के लिए अधिक नहीं है, जो लिखा है, वह आपको प्रविष्टि में मौजूद कड़ी तक ले जाने के लिए बहाना मात्र है।
हुआ यूँ कि फ़ुरसतिया जी ने इसके पहले मेरा पुराना चिट्ठा नहीं देखा था, फिर उन्होंने कहा कि उन्हें पढ़ के अच्छा लगा। फिर मैंने भी कहा कि मुझे भी वह चिट्ठा पढ़ के अच्छा लगता है।
तभी उन्होंने कहा कि अतीत सुहाना लगता है।
पर ये जान के खुशी हुई कि आप मेरी प्रविष्टियों मे गूढ़ अर्थ ढूँढते हैं। :)