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16.10.05

एक और मलयालम चिट्ठा

गिरगिट से पता चला कि ये चिट्ठा
वायनशाल सीमकळिल्लात्त विचारङ्ङळ्‍, निबन्धनकळिल्लात्त बुद्धि, अदम्यमाय चोदन, अनन्यसाधारणमाय क्रियात्मकत, बौद्धिकपरमाय उद्बुद्धत ..इवयॆल्लां वऴि मानवराशियुटॆ उयर्‍च्च
के बारे में है। और भी मिले - कलेषिन्रे लोकं, सांस्कारिकं, तोन्न्याक्षरङ्ङल, फ्रेयिमिलूटे.., खसाक्क्, समकालिकं, और सूर्यगायत्री

ये मुझे मिला, गौरव सबनीस को खोजते खोजते। वैसे आपने अर्ज़ी पर दस्तखत किए?
गौरव सबनीस
14:11 बजे आलोक द्वारा।
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