मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह : व्याकरण और हिज्जे

Can't see Hindi?

Why can't I see the Hindi section?

3.7.06

व्याकरण और हिज्जे

कई लोगों की प्रविष्टियाँ पढ़ के कर लगा कि अरे दइया, मैं लिखने में इतनी ग़लतियाँ करता हूँ। शायद किसीने किसी ने टोका होता तो मैं इन्हें सुधार भी लेता। सो आज से मीन मेख अभियान शुरू किया है, दूसरों के लिखे में ग़लतियाँ निकालने का, इस उम्मीद में कि लोग यही कड़वी दवा मुझे भी पिलाने को अग्रसर होंगे। अब होते हैं नौ दो ग्यारह, हमें है अब दफ़्तर जाना।
14:01 बजे आलोक द्वारा।
16 छींटाकसी
इस लेख के हवाले
16 छींटाकसी -
Anonymous संजय बेंगाणी ने अर्ज़ किया है...
यह आप अच्छा करने जा रहे हैं. शुभस्य शिघ्रम. निकालीये मीन-मेख, आपका स्वागत हैं. वैसे भी हिज्जे जिसे हिन्दी में वर्तनी कहते हैं कि सर्वाधिक भुलें मेरी ही होती हैं.
"कई लोगों की प्रविष्टियाँ पढ़ के लगा..."
क्या इसे इस प्रकार नहीं लिखा जाना चाहिए
"कई लोगों की प्रविष्टियाँ पढ़ कर लगा..."
पहले वाली मुम्बईया हिन्दी लगती हैं.
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
c/शिघ्रम/शीघ्रम्
वैसे शीघ्रम भी चलेगा।

c/निकालीये/निकालिये या निकालिए

c/भुलें/भूलें

पढ़ के लगा - मेरे हिसाब से तो ठीक ही है - के और कर - दोनो ही।

औरों के क्या विचार हैं?
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
मुम्बईया हिन्दी लगती हैं.
हैं नहीं, है।
Anonymous संजय बेंगाणी ने अर्ज़ किया है...
देखा आलोकजी, मैं ना कहता था की सबसे ज्यादा वर्तनी की भूलें मैं ही करता हुं. चार पंक्तियों में आठ भूले वाली बात हो गई.
हालाकि "पढ़ के लगा" अभी भी नहीं जच रहा.
और यह हैं तथा है का क्या चक्कर हैं.
कब हैं होता हैं और कब है.
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
कब हैं होता हैं और कब है.

हैं - बहुवचन
है - एकवचन
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
पढ़ के लगा

एक उदाहरण -
कर के लगा
या
कर कर लगा?

मेरे हिसाब से दोनो सही हैं, क्षेत्रीय फेरबदल हो सकते हैं।
Anonymous संजय बेंगाणी ने अर्ज़ किया है...
आपका धन्यवाद.
है में भी एकवचन-बहुवचन!! यह बात मेरी जानकारी में नहीं थी.
लगता है यह चर्चा परिचर्चा पर होती तो और लम्बी चलती, यहाँ इसे आगे बढ़ाना सही नहीं हैं.
वर्तनीयाँ याद नहीं रहती इस लिए स्कुल के जमाने में हमेंशा मेरे 10-15 अंक कट जाते थे और मैं एक-दो अंको से कक्षा में दुसरे क्रम पर आता था.
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
आगे बढ़ाना सही नहीं हैं
आगे बढ़ाना सही नहीं है

c/वर्तनीयाँ/वर्तनियाँ

c/स्कुल/स्कूल
c/दुसरे/दूसरे
Blogger Vinay ने अर्ज़ किया है...
आलोक,

बढ़िया. अभियान में मुझे भी शामिल समझो यानी मेरी ग़लतियाँ बताने में संकोच मत करना.

'पढ़कर' ज़्यादा उचित है. 'करकर' ना लिखने की वजह तो जाहिर है. यह भ्रामक है, इसलिए 'करके' लिखते हैं. पर अन्यथा 'कर' की जगह 'के' लिखना ठीक नहीं है, भ्रमकारी भी हो सकता है.

तो लो शुरू करें सुधाराक्षरी लेकर.. :)

किसीने -> किसी ने
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
विनय - ठीक किया, वैसे गीता प्रेस वाले, मेरा मतलब हैगीता प्रेसवाले अरसे से का, के, में, से, ने, पर आदि सञ्ज्ञा के साथ जोड़ कर पुस्तकें छाप रहे हैं, और उनके जालस्थल पर भी यही शैली है। पुरानी किताबों में ख़ासतौर पर यह शैली मिलेगी, विशेषतः संस्कृतनिष्ठ हिन्दी में।
Blogger Raman Kaul ने अर्ज़ किया है...
बहुत बढ़िया काम का बीड़ा उठाने के लिए गुड-लक।

> शायद (किसीने) किसी ने टोका होता..
इन नियमों के अनुसार किसीने सही है।

>... गीता प्रेस वाले, मेरा मतलब हैगीता प्रेसवाले...
यहाँ क्या अन्तर है? मुझे तो पहला ही सही लग रहा है।
Blogger Raman Kaul ने अर्ज़ किया है...
यह भी देखें।
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
अन्तर, प्रेस वाले और प्रेसवाले के बीच - इङ्गित करने की कोशिश थी।
Blogger Vinay ने अर्ज़ किया है...
इन नियमों के अनुसार किसीने सही है।

रमण जी:

उन नियमों के हिसाब से भी यह सही नहीं है। 'किसी' सर्वनाम नहीं है।
Blogger Raman Kaul ने अर्ज़ किया है...
मुझे लगता है कि "किसी" सर्वनाम है
Anonymous राजीव ने अर्ज़ किया है...
अरे! यहां तो कदाचित अर्थ ही बदल सकता है (अथवा नहीं भी) वर्तनी की बात भी अनूप जी इसी चिठ्ठे में कर रहे थे, अब क्या मंतव्य है यह तो अनूप भाई ही जानें ।
छींटाकसी करें

इस लेख के हवाले:

एक लिंक बनाएँ

पिछले लेख:

बासी माल:


Home © Alok Kumar alok at devanaagarii dot net, 2002-2010, सीऍसऍस © डब्ल्यू ३ सी .

Valid XHTML 1.0 Strict Valid CSS!

Google

मुख