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11.6.07

पत्रकारों के चिट्ठे - स्वागतम् खबरियों!

बेचैन उत्साही, रवीश कुमार, मौतरमा खबरफ़रोश, इरफ़ान, मेरठ के सचिन जी, और अभय तिवारी - यानी जाल पर पत्रकारों के चिट्ठे। आपका स्वागत है। जाल पर पत्रकारों के और चिट्ठे हों तो उन्हें यहाँ प्रस्तावित किया जा सकता है, ताकि ये नेट्स्केप की निर्देशिका में प्रकट हो सकें। जो यहाँ पहले ही सूचित हैं वह अपना पता बदलने का अनुरोध भी कर सकते हैं, और कोई भी भला मानुस http://dmoz.org/World/Hindi/समाचार/प्रचार माध्यम/पत्रकारिता/पत्रकार वर्ग के सम्पादक बनने का आवेदन कर सकता है। मिड डे के इस लेख में इस बात की गन्ध आई कि लोगों को अचरज हो रहा है कि हिन्दी के पत्रकार अच्छा लिख सकते हैं। भई इसमें अचरज की क्या बात है। जो पत्रकारिता से पैसा कमाता है वह अच्छा तो लिखेगा ही। एक और जगह चर्चा हुई कि जाल पर लिखने वालों को अपनी औकात में रहना चाहिए साहित्य वाहित्य उनके बस की नहीं है। क्या पत्रकारिता साहित्य है? क्या चिट्ठा लिखना साहित्य है? क्या चिट्ठाकार पत्रकार है? वैसे तो यह केवल शब्द ही हैं, मुझे इन सवालों के जवाब नहीं पता। एक बहुत अच्छी शुरुआत, इस लेख में कई चीज़ें उत्तेजनात्मक हैं इसलिए बहुत हो गया, अब होते हैं हम नौ दो ग्यारह। मेरे हिसाब से इन चिट्ठों और गैर पत्रकारी चिट्ठों में फ़र्क ये हैं कि
  • ये पेशेवर पत्रकारों द्वारा लिखे गए हैं
  • इनके लेखों में वर्तनी और व्याकरण की गलतियाँ नहीं के बराबर हैं
  • भाषा में स्वाभाविकता है
  • एक मुँहफटपना है
  • लम्बे लम्बे लेख हैं, बिना अनुच्छेदों में विभाजन के, और बिना सन्दर्भों, और कड़ियों के
  • ख़ास विषयों को छू रहे हैं
  • और जोड़ें
  • 12:17 बजे आलोक द्वारा।
    7 छींटाकसी
    इस लेख के हवाले
    7 छींटाकसी -
    Anonymous संजय बेंगाणी ने अर्ज़ किया है...
    अनघड़ सौंदर्य से वंचित है.
    Anonymous नितिन बागला ने अर्ज़ किया है...
    अभय तिवारी शायद २-३ बार अलग-अलग जगहों पर कह(लिख) चुकें हैं कि वे पत्रकार नही हैं...
    :)
    Blogger Shrish ने अर्ज़ किया है...
    आलोक जी क्या डीमॉज पर हिन्दी चिट्ठों की कोई अलग श्रेणी है?
    Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
    http://dmoz.org/World/Hindi/संगणक/अन्तर्जाल/जाल_पर/चिट्ठे
    Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
    श्रीष, कड़ी ठीक से नहीं आई,

    ये रही
    Anonymous dhurvirodhi ने अर्ज़ किया है...
    मैं भी श्री नितिन बागला का समर्थन करता हूं.
    अभय तिवारी इन्सान हैं, पत्रकार नहीं हैं.
    Blogger Shrish ने अर्ज़ किया है...
    आलोक जी धन्यवाद! मैंने भी अपना चिट्ठा जोड़ने के लिए आवेदन कर दिया है।
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