कुछ दिनो पहले मैंने
डिग पर हिन्दी का एक लेख प्रकाशित करने की कोशिश की। लेकिन हिन्दी का लेख नहीं छाप पाया - शीर्षक में हिन्दी स्वीकार्य नहीं था, या ऐसी ही कोई समस्या। डिग पर लोगबाग अपनी पसन्द की खबरें - यानी जालस्थलों के पन्नों की कड़ियाँ - प्रस्तावित करते हैं, और फिर यदि और लोगों को पसन्द आती हैं, तो वे उनके बगल में मौजूद लघु छवि पर चटका लगा के घोषित करते हैं कि उन्हें पसन्द आईं। इस प्रकार पहले पन्ने पर हमेशा सबसे लोकप्रिय खबरें होती हैं, अगले पर उससे कम, आदि आदि। यह क्रम लगातार बदलता रहता है, नई खबरों के आने और लोगों की राय के अनुसार।
तो बात हो रही थी कि डिग पर हिन्दी के लेख नहीं छाप पा रहा था। फिर परसों मुझे मिला
हिन्दी जगत् - यह लगभग हिन्दी का डिग ही है। आप भी
आजमा के देखें।
<जोड़ा>
देख रहा हूँ इसे डालने से क्या होता है -
Save This News!
</जोड़ा>
Labels: डिग, हिंदी जगत, हिंदीजगत, हिन्दी जगत, हिन्दी जगत्, हिन्दीजगत्
13:02 बजे आलोक द्वारा।
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इस लेख के हवाले
धन्यवाद
“आरंभ” संजीव का हिन्दी चिट्ठा
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