बस यही नहीं समझ आता कि अपनी ही चीज़ के लिए बार बार दावा क्यों ठोंकना पड़ता है। वैसे हिंदी ब्लॉग्स की शक्लोसूरत इतनी बढ़िया है कि नौ दो ग्यारह होने का मन ही नहीं करता। मैं वहाँ कम से कम २० मिनट तो बिता ही चुका हूँ। बस ऊपर तस्वीर में जो लिखा है वह हिंदी में होता तो मज़ा आ जाता।लेबल: अंतर्जाल, अन्तर्जाल, निर्देशिका, निर्देशिकाएँ, संगणक, सङ्गणक
20:21 बजे आलोक द्वारा।
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यूँ मुझे इस तमगे से आपत्ति नहीं है, पर उसमें कुछ अंश तो हिंदी का होता। :)
दावा प्रतिदावा तो कैर चलता ही रहता है संसार में, मेरे ससुर जी बता रहे थे कि किस तरह महज़ ६०० रुपये की माहवार पेंशन के लिये उन्हें हर साल ये दावा करना पड़ता है कि वे जिंदा हैं ;)
अमित: जब तक कोड पोस्ट न करें मालिकियत नहीं मिलेगी तो दावा सिद्ध होने तक पोस्ट न आपके लिये खामख्वाह होती है न के लिये :) हाँ उसके बाद न वो आपके काम की रहती है न हमारे काम की। वैसे अक्लमंद को इशारा काफी होता है, क्लेम करने भर के लिये खामख्वाह पोस्ट न लिखें, पोस्ट लिखें और इस कोड को पोस्ट की पूँछ बना कर ठेल दें। आलोक ने कम से कम अपनी पोस्ट का "कुछ कहने के लिये" तो इस्तेमाल किया।
शुक्रिया, शुक्रिया :) वैसे जिस स्थल के साथ आपका नाम जुड़ा हो उससे हम इसी तरह की बेहतरीन सेवाओं और सुविधाओं की उम्मीद करते हैं!