कल के लेख के बाद जापान के बारे में थोड़ी और खोज करते करते कुछ और अच्छे स्थल मिले - द वर्ल्ड इन फ़ोटोज़ और प्लानिगो - रोज कि दुनिया से तंग आ गए हों तो जमा पूँजी यूरोप घूमने लगाइए और तस्वीरें खींचिए। यह भी पता चला कि जापान में नेपाली लोग काफ़ी संगठित हैं। अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह रोज़ की दुनिया में प्रवेश करने के लिए।
रोज या रोज़?
सुधारें!!
जैसे ही ब्लॉगर की समस्या सुलझ जाएगी वापस हिंदी कर दूँगा।