स्थल का शीर्षक यह बता देता है कि स्थल निर्माता किस इलाके के हैं - महाराष्ट्र/गुजरात में इ और ई की मात्राओं की उलट पुलट बहुत आम है, जैसे दीप्ति के बजाय दिप्ती - और बोलते भी कुछ कुछ वैसे ही हैं, तो ठीक है।
केवल भक्ति पर मूषक फिराने से मनोरंजन तो होता ही है, जीवित अवस्था में परम मोक्ष पाने के नुस्खे आपको सीधे जळगांव से मिलेंगे। ऑडियो व्हीडियो कैसेट भी मिलेंगे।
वैसे महाराष्ट्र के स्थलों की कुछ पहचान -
१. संख्याएँ देवानगरी में
२. इ और ई की मात्राओं की उलट पुलट (जिवित बनाम जीवित)
३. ळ का धड़ल्ले से प्रयोग
४. अंग्रेज़ी के शब्दों की विशिष्ट वर्तनी - जैसे वीडियो नहीं व्हीडियो
५. चन्द्र बिन्दु की अनुपस्थिति (कहा बनाम कहाँ)
भाषा की विविधता ही कहेंगे इसे।
बहरहाल यह सब मोह माया, नुक्ता चीनी को नौ दो ग्यारह मान के व्यक्त भावों पर ध्यान दें और
ज्ञानचर्चा पढ़ें।

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17:47 बजे आलोक द्वारा।
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