निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल। अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन।दिलचस्प बात यह है कि यहाँ एचटीएमएल और पेजमेकर सीखने के लेख भी हैं, ऐडसेंस का बेहिचक इस्तेमाल है, और एक दिलचस्प चिट्ठा भी है। बढ़िया काम है जी के ए जी। शायद वनस्पति आधारित चिकित्सा का भी एक विभाग बनाया जा सकता है।
10:30 बजे आलोक द्वारा।
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बाकी; चीजें आप खोज-खोज कर लाते हैं; मानना पड़ेगा!
जानकर खुशी हुई कि आपको हिंदी वेबसाइट पसंद आया। धन्यवाद! मैंने 'कृति निर्देशिका' के नाम से हिंदी 'आर्टिकल डायरेक्टरी' भी बनाया है (url: httP://kriti.agoodplace4all.com)। गुणीजन यदि अपनी रचनाएँ उसमें भी प्रकाशित कर के उसे सफल बनायेंगे तो मुझ पर उपकार तो होगा ही, अन्तर्जाल में हिंदी का वर्चस्व भी बढ़ेगा।
जी.के. अवधिया