फिर समोसा भेजा -
समोसा पहुँचा दिया गया -
क्योंकि समोसा मैंने भेजा तो खुद ही को था, इसलिए टूँ टूँ आ गई एक सेकिंड बाद।
तो हमने समोसे के लिए हाथ बढ़ाया,
और पूरा का पूरा हिन्दी में मिला!
जबकि फ़ोन को न हिन्दी के समोसे बनाना आता है, न खाना - सिर्फ़ डब्बे ही दिखते हैं फ़ोन में।
केबल नहीं हो तो पीसी और फ़ोन दोनो में नीलदन्त हो तो भी चलेगा! इस सब को करने के लिए जी पी आर ऍस की भी ज़रूरत नहीं है।
यानी भले ही हिन्दी फ़ोन पर नहीं दिखे, केबल या नीले दाँत तो आप उसमें गाड़ ही सकते हैं!
जब तक रहेगा नोकिया का केबल, समोसे में रहेगी हिन्दी।
(तुक नहीं मिली, इसलिए होता हूँ नौ दो ग्यारह।)लेबल: अन्तर्राष्ट्रीयकरण, तकनीक, मोबाइल, विण्डोज़, समोसे
22:44 बजे आलोक द्वारा।
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९-२-११ मत होइये तुक हम मिला देते हैं -
नोकिया का रक्खो केबल हमेशा। हिन्दी का खाओ लजीज समोसा!
बाकी, और बेहतर तुक मिलाने वाले बहुत हैं - चिठ्ठाजगत तो कलावर्ग वालों से अंटा पड़ा है!
जब तक रहेगा नोकिया का केबल, समोसे में रहेगी हिन्दी स्टेबल.
अब 9 - 2- 11 को 11 नही 22 होना होगा.