मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह : 3 कदमों और 800 रुपए सालाने में अपने डोमेन पर अपना चिट्ठा चढ़ाएँ - बाकी सब कुछ वैसा ही जैसा ब्लॉग्स्पॉट पर। है न आसान? बन गई पहचान!

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29.5.08

3 कदमों और 800 रुपए सालाने में अपने डोमेन पर अपना चिट्ठा चढ़ाएँ - बाकी सब कुछ वैसा ही जैसा ब्लॉग्स्पॉट पर। है न आसान? बन गई पहचान!

  1. रीडिफ़ पर जा के एक डोमेन खरीदें।* जैसे कि meranaam.in, कीमत करीब 800 रुपए सालाना।
  2. डोमेन में CNAME प्रविष्टि डालें - ताकि example.in पहुँचे ghs.google.com पर। आधिकारिक जानकारी
  3. ब्लॉगर.कॉम के खाते में सेटिंग्स -> प्रकाशन पर जा के, "कस्टम डोमेन" को चुनें। देखें - उसके बाद, "उन्नत सेटिंग्स पर जाएँ" और अपना डोमेन नाम दे के सँजो लें। देखें -

बस! आपका चिट्ठा puraanaanaam.blogspot.com के साथ साथ अब meranaam.in पर भी दिखेगा!

* कुछ अपेक्षित शकों और सवालों के जवाब -

आप चाहें तो पहले अपने डोमेन का उपडोमेन बना सकते हैं और फिर उस उपडोमेन के लिए सीनेम दे सकते हैं, जैसे कि bakbak.meranaam.in - ताकि यदि चाहें तो अपने डोमेन के बाकी हिस्से पर बाद में कुछ और डाल सकें।

जीता जागता उदाहरण - चिट्ठाजगत का आधिकारिक चिट्ठा - http://chittha.chitthajagat.in - इसी विधि से ही प्रकाशित होता है!

कोई और शक या सवाल?

पुनश्च - रामचन्द्र मिश्र जी का http://hindi.rcmishra.net/ भी इसी सेवा के तहत चलता है।

पुनश्च २ - कुछ जानकारी अगले लेख में भी है।

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06:30 बजे आलोक द्वारा।
11 छींटाकसी
इस लेख के हवाले
11 छींटाकसी -
Blogger Udan Tashtari ने अर्ज़ किया है...
अच्छी जानकारी के लिए साधुवाद. आभार.
Blogger Gyandutt Pandey ने अर्ज़ किया है...
चलिये, वित्तमंत्रालय (पढ़ें पत्नीजी) से ८०० रुपये स्वीकृत कराते है, इस काम के लिये!
Blogger Jagdish Bhatia ने अर्ज़ किया है...
एक शंका का समाधान करें:
हम अपने डोमेन पर इसलिये जाते हैं कि हमारा चिट्ठा गूगल या वर्डप्रैस पर निर्भर न रहे। कभी भी गूगल हमारे खाते या चिट्ठे को प्रतिबंधित करने का हक रखता है।

आपने जो प्रक्रिया बतायी है इससे क्या चिट्ठे की निर्भरता पूरी तरह से गूगल से हट जायेगी ?
Blogger RC Mishra ने अर्ज़ किया है...
आलोक जी, जानकारी पूर्ण लेख के लिये बहुत धन्यवाद।
मेरा हिन्दी चिट्ठा हिन्दी ब्लॉग इसी व्यवस्था के तहत गुगल की सेवायें ले रहा है, हाँलांकि मेरा वर्ड प्रेस पर आधारित अपना चिट्ठा भी है|

@ Jagdish Bhatia

मेरे विचार से बतायी गयी प्रक्रिया द्वारा चिट्ठे की निर्भरता गुगल पर और बढ़ जायेगी।

एक बात और, इस सुविधा से आप जब चाहें अपने चिट्ठे को किसी URL से अब और आसानी से हटा सकते हैं, और मौका मिलते ही उसे वहीं पुनः स्थापित कर सकते हैं। मतलब अपने चिट्ठे का URL Dynamic रख सकते हैं :)
Blogger बाल किशन ने अर्ज़ किया है...
इतनी अच्छी जानकारी के लिए धन्यवाद.
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
जगदीश जी, आप सही कह रहे हैं, गूगल के "चंगुल" से तो कतई बचा नहीं जा रहा है इस विधि से। वैसे दूसरे नज़रिए से देखें तो अपना डोमेन लेने के और भी कारण हो सकते हैं, जैसे कि अपनी पहचान बनाना - जैसे कि काकेश जी, आलोक पुराणिक जी और अपने देबू ने किया है।

इसी प्रकार, डोमेन ले लेने से ही सारे चंगुलों से बचने की गारंटी भी नहीं है। आपका आतिथ्य - होस्टिंग - प्रदाता भी आपका खाता कभी भी बन्द कर सकता है, बिना कारण बताए। इसी प्रकार आपको डोमेन प्रदाता भी बिना कारण बताए डोमेन आपसे छीन सकता है - डोमेन संबंधी नियमों - अपवादों के तहत। यह दोनो लोग कुछ नहीं करें तो भी आपके देश की सरकार आपके ऊपर कुछ कार्यवाही कर सकती है। अगर वास्तव में लक्ष्य इन सब चीज़ों से बचना है तो डोमेन लेना मात्र ही काफ़ी नहीं है।

यह विधि बस गैर-प्रोग्रामरों को ८०० रुपए सालाना के खर्च पर अपने डोमेन में काम करने की सुविधा देती है, होस्टिंग के खर्च के बगैर।
आपका क्या विचार है?
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
रामचन्द्र मिश्र जी, जानकारी के लिए धन्यवाद! मुझे नहीं पता था कि आपका चिट्ठा भी इसी पर आधारित है। लेख में जोड़ दिया है।

इस सुविधा की यही तो खूबी है कि पाठक को पता भी नहीं चलता कि इसका प्रयोग किया जा रहा है, और आप जब चाहें डोमेन की अदला बदली भी कर सकते हैं - वैसे अदला बदली बार बार न की जाए तो ही बेहतर है!
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
रामचन्द्र मिश्र जी, जानकारी के लिए धन्यवाद! मुझे नहीं पता था कि आपका चिट्ठा भी इसी पर आधारित है। लेख में जोड़ दिया है।

इस सुविधा की यही तो खूबी है कि पाठक को पता भी नहीं चलता कि इसका प्रयोग किया जा रहा है, और आप जब चाहें डोमेन की अदला बदली भी कर सकते हैं - वैसे अदला बदली बार बार न की जाए तो ही बेहतर है!
Blogger डा० अमर कुमार ने अर्ज़ किया है...
बड़े मौके से मिले आप, गुरु !
मैं यही जानकारी तो खोज ही रहा था ।
धन्यवाद ।
Blogger Jagdish Bhatia ने अर्ज़ किया है...
जवाब के लिये धन्यवाद आलोक जी,
वास्तव में मैं भी अपना डोमेन लेने के बारे में सोच रहा हूं इसीलिये जानना चाह रहा था कि अपना डोमेन कितना ’अपना’ और कितना दूसरों पर निर्भर हो सकता है।

हां, मेरे जैसे गैर तकनीकी लोगों के लिये यह एक आसान विकल्प है।
Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
अमर जी धन्यवाद आपका पढ़ने के लिए। इन्तज़ार रहेगा आपके डोमेन का, बताइगा, पूरी कार्यवाही कर लेने के बाद!
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