जनाब, अगर आपने नहीं पढ़ा हो तो तुरन्त चटका लगाइए – कॉफ़ी विद कुश की ओर से एक साक्षात्कार, पल्लवी त्रिवेदी का। पल्लवी का संटी वाला लेख तो मैंने भी पढ़ा था, पर उस समय यह नहीं पता था कि वे भोपाल पुलिस में काम करती हैं! बढ़िया है, पहले बाड़मेर, फिर सीकर तो अब भोपाली क्यों नहीं!
वैसे पल्लवी के लेखन में पुलिसिया कुछ भी नहीं है, और लाख की बात एक – दिलचस्प है कुश और पल्लवी की गुफ़्तगू। आप भी पढ़िए इस ३५ टिप्पणी वाले साक्षात्कार को, हम होते हैं नौ दो ग्यारह।
वैसे बाड़मेरी और सीकरी चिट्ठी ही शायद दो ऐसे चिट्ठे होंगे जहाँ टिप्पणी सम्राट अपने मोती नहीं बिखेरते हैं!
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टिप्पणी सम्राट!! :)