वह भी कुद का पतीसा खा के। दरअसल ज़्यादा कुछ है नहीं इसमें और हो सकता है कोई संपादक-वंपादक अब तक इस पर कैंची चला चुका हो पर लिख तो डाला ही। ये बात सही है कि अनुवाद के बजाय ताज़ा माल लिखना उतना ही बढ़िया लगता है जितना कुद का पतीसा खाना।
कई साल(यानी अन्तर्जाल के साल, वास्तव में हफ़्ते) पहले यह सोचा था कि हिन्दी के लेखों में जित्ते भी अहिन्दी विकीपीडिया संदर्भ हैं उनकी फ़ेरहिस्त तैयार की जाए। पर चौदहवीं का चाँद देखने से फुरसत मिले तब न। वैसे फ़िल्म अच्छी थी।
संजय बेंगाणी ने अर्ज़ किया है...
Udan Tashtari ने अर्ज़ किया है...
dhiru singh {धीरू सिंह} ने अर्ज़ किया है...
प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर ने अर्ज़ किया है...
sharlin kaur ने अर्ज़ किया है...
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