वह भी एक दिन में पचास।
और उन्हें नौ दो ग्यारह करने का भी।
चलो इस बहाने मैंने कुछ लिखा।
अफ़सोस भी हुआ, कि इतने सालों से बे-छींटाकसी वाले लेखों पर १ की संख्या दिखने लगी, पर उसे फिर से सिफ़र पे लाना पड़ा!लेबल: तकनीक
21:57 बजे आलोक द्वारा।
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केवल नाम ही क़ाफ़ी है.. नौ-दो-ग्यारह !