मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह

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15.2.08

फ़ायर्फ़ाक्स ३.० में देवनागरी सुधरी - दोसौदो तीनसौ इक्यावन - बिरगिट मीठी है!

फ़ायर्फाक्स की दोसौदो तीनसौ इक्यावन वाली बीमारी अब ठीक हो गई है। बीमारी यह थी, और उसके अलावा दो और भी। पर इसके लिए आपको फ़ायर्फ़ाक्स ३.० उतारना होगा, जो कि बिरगिट मीठी करेगा! खत्म हुई दो सौ दो तीन सौ इक्यावन, बावन, चौवनग्रीज़्मंकी की नास्त्यावश्यकता। बधाई मुझे न देना, मैं सिर्फ़ ब्यौरा दे के नौ दो ग्यारह हो गया था, वह भी कुछ चार साल पहले। उम्मीद है कि अगले चार साल में ब्लॉगर मुखपृष्ठ भी सुधर जाएगा!

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19:12 बजे आलोक द्वारा।
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12.2.08

मेरे फ़ोन में हिन्दी नहीं, कोई गल नहीं। पीसी में तो है न? भेजो समोसे दनादन

हिन्दी में समोसे भेजने के लिए ज़रूरी नहीं कि फ़ोन में हिन्दी हो, न ही पढ़ने के लिए। मेरे नोकिया ६२६० में हिन्दी नहीं है, पर पीसी पर नोकिया पीसी स्यूट लगाया, फ़ोन को सी ए ५३ केबल से जोड़ा, और पहले सन्देश लिखा - मोबाइल से नहीं, पी सी से - नोकिया हिन्दी सन्देश प्रेषण - १ फिर समोसा भेजा - नोकिया हिन्दी सन्देश प्रेषण - २ समोसा पहुँचा दिया गया - नोकिया हिन्दी सन्देश प्रेषण - ३ क्योंकि समोसा मैंने भेजा तो खुद ही को था, इसलिए टूँ टूँ आ गई एक सेकिंड बाद। तो हमने समोसे के लिए हाथ बढ़ाया, समोसा मिला और पूरा का पूरा हिन्दी में मिला! सन्देश पठन सन्देश पूर्वावलोकन जबकि फ़ोन को न हिन्दी के समोसे बनाना आता है, न खाना - सिर्फ़ डब्बे ही दिखते हैं फ़ोन में। केबल नहीं हो तो पीसी और फ़ोन दोनो में नीलदन्त हो तो भी चलेगा! इस सब को करने के लिए जी पी आर ऍस की भी ज़रूरत नहीं है। यानी भले ही हिन्दी फ़ोन पर नहीं दिखे, केबल या नीले दाँत तो आप उसमें गाड़ ही सकते हैं! जब तक रहेगा नोकिया का केबल, समोसे में रहेगी हिन्दी। (तुक नहीं मिली, इसलिए होता हूँ नौ दो ग्यारह।)

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22:44 बजे आलोक द्वारा।
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