मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह

Can't see Hindi?

Why can't I see the Hindi section?

22.12.07

अताउल्ला खां

अताउल्ला खां, नुसरत फ़तेह अली खाँ और अल्ताफ़ रज़ा, इन तीनों में ज़बर्दस्त होड़ रहती है मेरे दिमाग़ में, यानी जब भी कोई कव्वाली या दर्द भरा किस्म का गीत रेडियो पर आता है तो लगता है कि ज़रूर इन तीनों में से किसी का होगा। पर पता नहीं चल पाता कि वास्तव में किसका है। कोई तोड़ है इसका किसी के पास? पर अताउल्ला खां को ले कर अब ज़्यादा दिक्कत नहीं आएगी, इनसे पूछा जा सकता है। वैसे क्या आप संस्कृत का कोई ऐसा शब्द जानते हैं जिसमें बीच में पूरे स्वर आते हों? मात्रा नहीं, पूरा स्वर।

लेबल:

13:08 बजे आलोक द्वारा।
1 छींटाकसी
इस लेख के हवाले
6.12.07

खाओ गगन, रहो मगन!

पर यह खाने वाला नहीं है, पढ़ने वाला है। वैसे गगन वनस्पति गायब कहाँ हो गया? [गायब या ग़ायब?] चन्द्रशेखर आज़ाद का इत्ता बड़ा काव्य संग्रह - बाप रे बाप। और ज़रूर हाइकु बाज़ों को यह विश्व का पहला भी पसंद आएगा। मगर सबसे बढ़िया चीज़ है बाल साहित्य। आज शाम को पढ़ता हूँ यह गगन।

लेबल: , ,

10:11 बजे आलोक द्वारा।
2 छींटाकसी
इस लेख के हवाले

पिछले लेख:

बासी माल:


Home © Alok Kumar alok at devanaagarii dot net, 2002-2010, सीऍसऍस © डब्ल्यू ३ सी .

Valid XHTML 1.0 Strict Valid CSS!

Google

मुख