अताउल्ला खां, नुसरत फ़तेह अली खाँ और अल्ताफ़ रज़ा, इन तीनों में ज़बर्दस्त होड़ रहती है मेरे दिमाग़ में, यानी जब भी कोई कव्वाली या दर्द भरा किस्म का गीत रेडियो पर आता है तो लगता है कि ज़रूर इन तीनों में से किसी का होगा। पर पता नहीं चल पाता कि वास्तव में किसका है। कोई तोड़ है इसका किसी के पास?
पर
अताउल्ला खां को ले कर अब ज़्यादा दिक्कत नहीं आएगी, इनसे पूछा जा सकता है।
वैसे क्या आप संस्कृत का कोई ऐसा शब्द जानते हैं जिसमें बीच में पूरे स्वर आते हों? मात्रा नहीं, पूरा स्वर।
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13:08 बजे आलोक द्वारा।
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