मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह

Can't see Hindi?

Why can't I see the Hindi section?

2.5.08

गूगल के मशीनी हिन्दी-अङ्ग्रेज़ी अनुवाद के साथ मौज

कुछ घण्टे पहले विनय के जरिए पता चला कि गूगल अनुवाद हिन्दी से अङ्ग्रेज़ी भी शुरू हो गया है। इसके पहले आईआईटी कानपुर का एक स्थल देखा था जहाँ ऐसे ही अनुवाद करने की सुविधा थी, पर गूगल के साथ मौज लेने की बात की कुछ और है न, लीजिए कुछ मौज -
  1. मेरा नाम आलोक है -
    My name is Alok
  2. गाय के चार पैर, चार थन, दो सींग और एक पूँछ होती है। -
    The cow has four legs, dug four, two horns and a tail.
  3. मेरे कुत्ते का नाम पिण्टू है -
    My dog's name is पिण्टू
  4. चारु चन्द्र की चञ्चल किरणें महक रही थीं जल थल में -
    Charu Chandra aroma rays were perk of the land in the water
  5. जानना चाहते हो मेरे पास क्या है? मेरे पास माँ है। -
    I do want to know? I have a mother.
  6. अकेले हम, अकेले तुम -
    We alone, you alone
  7. मेरा जूता है जापानी, ये पतलून है इङ्ग्लिस्तानी, सिर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी -
    My shoe is Japanese, these pants is इङ्ग्लिस्तानी, head of the Russian pay-red cap, the heart is Hindustani
  8. दिल तो है दिल, दिल का ऐतबार क्या कीजे। आ गया जो किसी पे प्यार, क्या कीजे। -
    Is the heart of the heart, the heart of what कीजे Aitbaar. The pay has been a love, what कीजे.
  9. आज कल पाँव ज़मीं पे टिकते नहीं -
    Today, not tomorrow feet ज़मीं pay टिकते
  10. मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू। -
    When you are the queen of my dreams would come.
  11. हम हैं राही प्यार के, हम से कुछ न बोलिए। -
    We are Rahi love, we बोलिए nothing.
  12. चलते चलते, मेरे ये गीत याद रखना, कभी अलविदा ना कहना। -
    Due to run, I remember these songs, not ever say goodbye.
  13. मेरा दिल भी, कितना पागल है, ये प्यार जो तुमसे करता है। पर सामने जब तुम आते हो, कुछ भी कहने से डरता है। -
    My heart also, how crazy, they love what exactly does. When you come on the front, afraid to say anything.
  14. बसन्ती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना। -
    बसन्ती, these dogs do not dance in front.
  15. वह दो थे, और तुम तीन? फिर भी बच गए? -
    He had two, and three of you? Yet escape?
  16. क्या आपको हिन्दी दिख रही है? -
    What you see is Hindi?
  17. मैं साँस लेता हूँ, तेरी खुश्बू आती है। -
    I'm taking breath, your खुश्बू amount.
  18. मैं और मेरी तन्हाई, अक्सर ये बाते करते हैं -
    I and my तन्हाई, they often do बाते
  19. जल गया -
    Water was
कोई शक? पाँचवी पास से तेज़ है। और अङ्ग्रेज़ी सिखाने के लिए भी अनुवाद स्थल पर एक कड़ी है जहाँ आप अधिक उचित अनुवाद सुझा सकते हैं। आप भी आजमाइए

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19:36 बजे आलोक द्वारा।
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16.4.08

ट्विटर के जरिए चहकिए और साथ में मुफ़्त के समोसे भी भेजिए और पाइए

ये जो कारस्तानियाँ आप देख रहे हैं, वह है ट्विटर की बदौलत। ट्विटर यानी चहकना। जिस तरह चिड़ियाँ सुबह से शाम चहकती हैं, उसी तरह आप भी चहक सकते हैं - रात में भी।

शुरू में तो मुझे पकाऊ चीज़ लगती थी, पर अब तो इसका नशा आ गया है। बस अफ़सोस यह है कि हिन्दी में चहकने वाले लोग थोड़े कम हैं। अगर आप भी चहकना शुरू करें तो मज़ा आ जाए।

चिड़ियाँ चहकती रहती हैं, पर आपको समझ नहीं आता कि वह कह क्या रही हैं, लेकिन चहकना सुनना अच्छा लगता है। ऐसा ही है ट्विटर पर चहकना। किसी भी समय सिर्फ़ एक सवाल का जवाब दें - कि इस वक़्त आप क्या कर रहे हैं?

इसमें आप जालस्थल से या अपने मोबाइल से सन्देश भेज सकते हैं - इतना ही नहीं, इसके जरिए आप मुफ़्त के समोसे भी पा सकते हैं - और भेज भी सकते हैं।

चलिए देखते हैं क्या क्या सुविधाएँ हैं यहाँ।

सबसे पहले ट्विटर.कॉम पर जा के खाता खोलना होगा।

ट्विटर सदस्यता

वहाँ पर अपना डाक पता देना होगा, उसकी पुष्टि करनी होगी,

ट्विटर जानकारी

और साथ ही अपना मोबाइल नम्बर भी दे सकते हैं(वैकल्पिक, लेकिन मुफ़्त समोसे उसके जरिए ही आएँगे न)।

ट्विटर मोबाइल

अब आप अपने ट्विटर पर सन्देश जोड़ते जा सकते हैं, ट्विटर के जालस्थल के जरिए, या फिर मोबाइल से, मोबाइल से सन्देश भेजने पर पैसे लगेंगे।

आप जो सन्देश भेजते हैं वह सबको दिखेंगे - यानी पूरी दुनिया को। इसलिए ध्यान दें, गोपनीय निजी बातें, फ़ोन नम्बर और डाक पते न भेजें। लेकिन आप चाहें तो अपने सन्देश गोपनीय रख सकते हैं, फिर केवल आपके पसन्दीदा लोगों तक ही यह सन्देश जाएँगे।

ट्विटर निजी

इसके अलावा, यदि आप किसी खास व्यक्ति तक ही अपनी बात पहुँचाना चाहते हैं तो "Direct Message" का इस्तेमाल करें। इससे उस व्यक्ति तक डाक पहुँचेगी, और यदि मोबाइल का विकल्प चुना हो तो ऍसऍमऍस जाएगा।

ट्विटर समोसे

इसी प्रकार, यदि आप चाहते हैं कि जब कोई और सन्देश भेजे तो आपके मोबाइल पर सन्देश आए, तो आप "Device Updates" को लागू कर सकते हैं।

ट्विटर समोसे पाएँ

खास बात यह है कि छोटे छोटे सन्देश - आप अपनी इच्छानुसार जब चाहें पढ़ सकते हैं। आपको डाक के जरिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। साथ ही मोबाइल पर भी सन्देश प्राप्त कर सकते हैं।

जहाँ तक मेरा अनुमान है, भारत में समोसे प्राप्त करने के कोई पैसे नहीं लगते। यह गलत भी हो सकता है, आपकी सेवा पर निर्भर है, पर यदि यह सही है तो "Direct Message" के जरिए आप दनादन मुफ़्त का माल खा सकते हैं। एक हफ़्ते में 250 तक सन्देश प्राप्त किए जा सकते हैं। मुफ़्त समोसे न हों तो भी चहकने में मज़ा तो आता ही है।

तो इन्तज़ार किस बात का है आप भी शुरू होइए न। और हम होते हैं नौ दो ग्यारह। सवाल हों तो पूछें!

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08:35 बजे आलोक द्वारा।
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14.4.08

अपने ब्राउज़र रूपी प्लेट्फ़ॉर्म पर हिन्दी के तमगे लगाएँ।

पिछली बार लिखा था कि जालस्थलों के स्वामी अपने स्थलों में हिन्दी के तमगे कैसे लगा सकते हैं। इससे पाठक रूपी यात्रियों और पटरी के दूसरी तरफ़ मँडराने वाले खोजी कुत्तों, दोनो तक पहुँचने में सुविधा होगी ऐसी आशा है।

पर साफ़ बात है कि लेखक दस हैं तो पाठक सौ, चाहे अंग्रेज़ी हो या हिन्दी। यानी जितने लोग लिखते हैं उससे कई गुना लोग पढ़ते हैं। अतः पाठक कैसे बताएँ कि उन्हें हिन्दी आती है, या हिन्दी के स्थल पसन्द करते हैं?

1. अपने ब्राउज़र में जा के भाषा पसन्द में हिन्दी को शामिल करें, और उसे सबसे ऊपर करें। ऐसा करने से कई भाषाओं में उपलब्ध स्थल होने पर, यदि हिन्दी में भी वह स्थल है तो आपको हिन्दी वाला दिखाया जाएगा, पहले से ही, स्थल पर पहुँचने के बाद भाषा बदलने की ज़रूरत नहीं होगी।

यह आप फ़ायर्फ़ाक्स में ऐसे कर सकते हैं,

फ़ायर्फ़ाक्स भाषा पसन्द

इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर में ऐसे कर सकते हैं,

इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर भाषा पसन्द

ऑपरा में ऐसे कर सकते हैं, ऑपेरा भाषा पसन्द 1

जोड़ने के बाद हिन्दी को सबसे ऊपर लाना न भूलें।

ऑपेरा भाषा पसन्द 2

साथ ही, जालराज नज़र रखते हैं कि किस किस यात्री ने कौन सी भाषा को सबसे ऊपर रखा है - उन्हें इशारा मिलेगा कि हिन्दी के स्थल पसन्द करने वाले लोग भी काफ़ी हैं, और वह उस दिशा में काम करेंगे।

2. अपनी प्रचालन प्रणाली - यानी ऑपरेंटिंग सिस्टम - की भाषा हिन्दी करें। जब भी आप किसी स्थल पर जाते हैं तो आपका एक हरकारा उसे यह बताता है कि आपका ब्राउज़र कौन सा है, प्रचालन प्रणाली कौन सी है, भाषा कौन सी है। हिन्दी में प्रचालन प्रणाली करने से आपका हरकारा स्थल को यह बताएगा कि अगला हिन्दी में शायद चीज़ें पसन्द करे। हर स्थल का प्रबन्धक भाषा के अनुसार आँकड़े देखता रहता है और भाषा हिन्दी होने पर हिन्दी के आँकड़े प्रबन्धकों को अधिक दिखेंगे, और वह भी हिन्दी में स्थल बनाने को प्रेरित होंगे।

विण्डोज़ के लिए आप हिन्दी वाला विंडोज़ प्राप्त कर सकते हैं।

हिन्दी वाले लिनक्स के लिए आप इण्डलिनक्स की मदद ले सकते हैं। अंग्रेज़ी में थोड़ी और विस्तृत जानकारी।

सेब पर आप हिन्दी का लोकेल चुन सकते हैं। अंग्रेज़ी में थोड़ी और जानकारी।

3. अन्ततः यदि आप अपने किसी साथी को अपने यन्त्र की कोई छवि निकाल के भेजते हैं, या फिर अपने स्थल पर कोई छवि छापते हैं, तो कोशिश करें कि हिन्दी वाली छवि छापें या भेजें, जैसे कि ऊपर इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर की छवि है। इससे लोगों में कौतूहल बढ़ेगा, और अधिक लोग हिन्दी का इस्तेमाल करेंगे, उससे अधिक जालराजों की हिन्दी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, और हिन्दी में सामग्री की बढ़ोतरी होगी।

पहले दो बिन्दु आपको बस एक ही बार करने होंगे, और वह दोनो करने के बाद आप जब भी छापने के लिए कोई छवि निकालेंगे, तो उसमें हिन्दी स्वतः ही आएगी। यह काम आप अपने दफ़्तरी यन्त्र पर भी कर सकते हैं, मैंने किया है।

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14:11 बजे आलोक द्वारा।
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13.4.08

अपने हटमल में हिन्दी के तमगे लगाएँ

अब बात चल ही पड़ी है तो अपने जालस्थल रूपी रेल के डब्बों पर दोनो तरफ़ हिन्दी के तमगे लगाने के बारे में भी कुछ।

अगर आपका कोई हिन्दी का जालस्थल नहीं है तो इस प्रविष्टि को नज़रन्दाज़ करें, अगली वाली का इन्तज़ार करें।

1. अपनी हटमल के <head> और </head> वाली चिप्पियों के बीच <meta http-equiv="Content-Type" content="text/html; charset=UTF-8"> चेंप दें। इससे प्लेटफ़ार्म पर मौजूद ब्राउज़रों और पटरी के उस पार मौजूद खोजी कुत्तों को यह पता चलता है कि आपका स्थल यूनिकोड में है।

2. अपनी हटमल के <head> और </head> के बीच <meta http-equiv="Content-Language" content="hi"> भी चेंपें। इससे पटरी की दूसरी तरफ़ मौजूद खोजी कुत्तों को पता चलता है कि आपकी सामग्री हिन्दी में है।

3. अपनी हटमल में हटमल चिप्पी की लैंग विशेषता में बताएँ कि आपके पन्ने की भाषा क्या है। <html lang="hi"> - वैसे <html> वाली चिप्पी तो आपके स्थल पर पहले ही होगी - वह तो आपकी रेल का इंजन है। अगर उसके आगे लैंग वाली विशेषता न दी हो तो उसे जोड़ दें।

4. अगर आप बीच में एकाध अनुच्छेद संस्कृत में चेंपते हैं तो खोजी कुत्तों को सूँघने के लिए कुछ और बू छोड़ें -

<html lang="hi">
<p> किसी विद्वान ने कहा है -
</p>
<p lang="sa">
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
</p>
<p>हमें इस पर मनन करना चाहिए। </p>
<p>विद्यापति जी ने कहा है - </p>
<p lang="mai">सैसव जौवन दुहु मिल गेल। </p>
<p>अमिताभ जी ने कहा है - </p>
<p lang="en">I can walk English and I can talk English. </p>
<p>तुलसीदास जी ने कहा है - </p>
<p lang="awa">माया महाठगिनी हम जानी। </p>
</html>

यहाँ पर कई <p> वाले डब्बे एक <html lang="hi"> वाले डब्बे के अन्दर हैं। पर किसी खास अन्दरूनी डब्बे की भाषा अलग हो तो केवल उसकी भाषा अलग से सुँघाई जा सकती है। इससे प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद यात्रियों - यानी ब्राउज़र में देखने वालों को कुछ खास फ़र्क नहीं पड़ेगा। सभी भाषाओं के कूट उपलब्ध हैं।

अगली बार प्लेटफ़ार्म पर मौजूद यात्रियों के लिए कुछ, क्योंकि वह भी स्टेशन मास्टर को अपने व्यवहार से कुछ बताते हैं।

और हाँ, हटमल किसी खटमल की प्रजाति नहीं है। इसका मतलब है ऍचटीऍमऍल। इस शब्द का ईजाद दिनेशराय जी ने किया है।

यह जानकारी अंग्रेज़ी में भी उपलब्ध है।

नौ दो ग्यारह होने से पहले -

अगर आप चिट्ठा स्वामी हैं तो पहली 3 चीज़ें आपको केवल एक बार अपने खाके में जा के करनी होंगी। चौथी चीज़ का हर प्रविष्टि में खयाल रखना होगा, उसमें भी यदि आप हटमल सम्पादन नहीं करते हैं तो नज़रन्दाज़ कर सकते हैं, क्योंकि "कंपोज़ मोड" में आपको हटमल नहीं दिखेगी।

अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।

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09:20 बजे आलोक द्वारा।
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11.4.08

ऍचटीऍमऍल, जायज़ और नाजायज़, रबर की पटरियाँ और रबर के प्लेटफ़ार्मों के बारे में चन्द बातें और एक सवाल

पिछले लेख में ऍचटीऍमऍल वैध और अवैध होने की बात लिखी थी तो कुछ लोगों ने इस बारे में और जानना चाहा इसलिए यहाँ लिख रहा हूँ। थोड़ी रेलगाड़ी वाली भाषा में समझाता हूँ। जिन्हें वैध ऍचटीऍमऍल के बारे में पता है वे तब तक इस लेख के नीचे दिए सवाल का जवाब देने का प्रयास करें।

रेल, पटरी पर चलती है। रेल के अन्दर आप चाहें ठंडे डब्बे बनाएँ, गद्दी वाले बनाएँ, सिर्फ़ कुर्सी वाले बनाएँ, या रसोई बनाएँ। शौचालय बनाएँ या चादर तकिए रखने के लिए गोदाम। आपकी मर्ज़ी है। डिब्बों का रंग लाल पीला नीला जो भी रखें, चाहें तो मालगाड़ी के डब्बे लगाएँ। बस दो बातें आपको याद रखनी ज़रूरी हैं - डब्बे के पहिये पटरी के हिसाब से हों, उनमें बने खाँचे पटरी में बैठ जाएँ। उसे आप नहीं बदल सकते, और दूसरा बिजली के तार से छुआने वाली चिमटी - जो इंजन के ऊपर होती है, वह सही तरह से बैठे। डब्बे के अन्दर, बाहर, जो चाहें करें, पर ऊपर और नीचे इन चीज़ों का खयाल रखना ज़रूरी है।

अब रेल के डब्बे के बदले आप अपने जालस्थल को लें, और पटरी व चिमटी(क्या कहते हैं उसे?) को आप मानक मानें। जालस्थल में आप जो भी चाहें लिखें, दिखाएँ, लिखवाएँ, वह दौड़ेगा जब तक आपकी ऍचटीऍमऍल मानक हो। इस स्थल की ऍचटीऍमऍल - को खोल के देखें - View -> Source कर के। आपको सबसे ऊपर एक पंक्ति दिखेगी -

<!DOCTYPE html PUBLIC "-//W3C//DTD XHTML 1.0 Strict//EN" "http://www.w3.org/TR/xhtml1/DTD/xhtml1-strict.dtd">

यह बताता है कि पटरी कौन सी है।

किसी और स्थल पर आपको दूसरे तरह की पंक्ति दिख सकती है - जैसे

<!DOCTYPE HTML PUBLIC "-//W3C//DTD HTML 4.01 Transitional//EN" "http://www.w3.org/TR/html4/loose.dtd">

यह आपको बताता है कि पटरी कौन सी है - छोटी लाइन या बड़ी लाइन। और भी तरह की होती हैं जैसे ऍचटीऍमऍल ट्रांज़िशनल आदि। सभी पटरियों की सूची आपको यहाँ मिलेगी

इस पंक्ति के बाद ही रेलगाड़ी के डब्बे लगने शुरू होते हैं - <html> से शुरू हो कर। और उन डब्बों का पटरी के अनुरूप होना ज़रूरी है। आखिरी डब्बा होता है </html> ऍचटीऍमऍल रेल से इस तरह थोड़ी अलग है कि यहाँ डब्बों के अन्दर डब्बे होते हैं - जैसे,

<html>
<head>
<title>
शीर्षक
</title>
<body>
और डब्बे और उन डब्बों में बहुत से डब्बे
</body>
</html>

पर आप अपनी मर्ज़ी से डब्बों का नाम नहीं रख सकते, वैध डब्बों का नाम, उसकी डीटीडी यानी डॉक्युमेण्ट टाइप डेफ़िनिशन में होता है। इन सभी पटरियों की माँ है ऍसजीऍमऍल, स्टैण्डर्ड जनरल मार्कप लैंग्वेज। इस के अधीन अलग अलग डीटीडी बना के ऍचटीऍमऍल, डब्लूऍमऍल (वैप फ़ोनों के लिए), और ऍक्सऍमऍल(चिट्ठों की बौछारों के लिए) की पटरियाँ बनाई गई हैं।

इस भाषा में तीन तरह की चीज़ें हैं - डब्बे का नाम, डब्बे की ख़ासियतें और डब्बे के अन्दर का माल।

<a href="http://example.com">उदाहरण</a>

यहाँ पर डब्बे का नाम है a (ऍङ्कर), डब्बे की खासियतें है (खास या ख़ास?) href, और डब्बे के अन्दर का माल है "उदाहरण"।

पटरी का मानक या डीटीडी यह बताता है कि कौन से डब्बे के अन्दर कौन कौन से डब्बे आ सकते हैं, और उनकी क्या क्या खासियतें बताई जा सकती हैं।

किसी पन्ने का ऍचटीऍमऍल सही है या नहीं, यह पता लगाने के लिए एक औज़ार है - वैलिडेटर.डब्लू३.ऑर्ग - इसके अलावा और भी कई औज़ार हैं, जिनसे यह पता लगाया जा सकता है।

अब आपका यही सवाल है न कि ऍचटीऍमऍल मानक न हो तो भी गाड़ी पटरी पर चल कैसे रही थी? चक्कर यह है कि प्लेट्फ़ार्म - यानी ब्राउज़र - और रेलगाड़ियाँ - यानी जालस्थल - पहले बन गए थे, पर पटरियाँ कुछ समय बाद बनीं। इसलिए ये प्लेट्फ़ार्म कंक्रीट के नहीं बने हैं, रबर के हैं, थोड़ी बहुत खींचतान करके भी काम चल जाता है। इतना ही नहीं, प्लेटफ़ॉर्म बनाने वाले ठेकेदार भी अलग अलग हैं - इंटर्नेट ऍक्स्प्लोरर, फ़ायर्फ़ाक्स, सफ़ारी, ऑपेरा और न जाने कितने। सभी को वही गाड़ी अपने प्लेटफ़ार्म पर रुकवानी है तो मानके के हिसाब से रेलगाड़ी को भी चलना होगा और मानक के हिसाब से ही प्लेटफ़ार्म को भी सही आकार देना होगा।

हमें लग सकता है कि ऍचटीऍमऍल अवैध होते हुए भी चल रही थी, पर ज़रा किसी अवैध स्थल को अलग अलग प्लेटफ़ार्मों पर चला के देखिए। वैध ऍचटीऍमऍल सभी पर एक सी दिखेगी, अवैध में थोड़ा फ़र्क दिखेगा। यह भी हो सकता है कि वैध ऍचटीऍमऍल किसी प्लेटफ़ार्म पर ठीक से न दिखे, पर वह अधिकांशतः इसीलिये होता है कि वह प्लेटफ़ार्म ठीक से नहीं बना है। जिस दिन प्लेटफ़ार्म वाले नया उद्धरण ले आएँगे, उस दिन हो सकता है वहाँ गाड़ी की टक्कर होनी शुरू हो जाए।

उम्मीद है इन रबर की पटरियों के बारे में यह जानकारी पर्याप्त होगी। इन प्लेट्फ़ार्मों के अलावा जालस्थलों को मोबाइलों से भी पढ़ा जाता है, और जाल खोजक तथा बौछार खोजक यन्त्र भी इन्हें पढ़ते हैं - वह प्लेट्फ़ार्म से नहीं आते, दूसरी तरफ़ से चढ़ते हैं - पटरी की दूसरी तरफ़ से। पर वांछा उन्हें भी यही होती है कि पटरी के हिसाब से रेलगाड़ी हो।

आशा है अब वैध ऍचटीऍमऍल की आवश्यकता से एक आविष्कार की इच्छा पैदा हो गई होगी। आविष्कार के बारे में आगे। तब तक जाँचिए अपनी रेलगाड़ी को।

अन्ततः एक सवाल - वैलण्टाइन डे पर चूहे ने बिल्ली को क्या कहा?

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10.4.08

गूगल डेस्कटॉप हिन्दी में

गूगल डेस्कटॉप काफ़ी समय से हिन्दी में भी उपलब्ध है। गूगल डेस्कटॉप यूँ तो आधा स लिखने की परंपरा नहीं है लेकिन व्याकरण की दृष्टि से गलत भी नहीं है। बहरहाल उम्मीद है कि गूगल वाले इसे जल्द ठीक कर देंगे। तब तक खोज के लिए दो बार कंट्रोल दबाएँ। गूगल खोज यह रहा गूगल डेस्कटॉप का हिन्दी जालस्थल - कैसा लगा आपको? आजमा के बताएँ।

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28.2.08

इस चिट्ठे की ऍचटीऍमऍल अवैध है

इस चिट्ठे का ऍच टी ऍम ऍल अवैध है। चक्कर यह है कि ब्लॉगर द्वारा जनित कूट इस मामले में ठीक नहीं काम कर रहा है। इसके लिए कुछ तोड़ खोजना होगा, किसी को पता हो तो बताए।

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27.2.08

संतोष तोट्टिङ्गल - ध्वनि - हिन्दी, कन्नड़ और मलयालम में लिखे को पढ़ने वाले तन्त्र के निर्माता

सन्तोष तोट्टिङ्गल ने बनाया है ध्वनि, जो कि लिखे को बोल कर सुनाने की काबिलियत रखता है, और इसने बढ़िया मुक्त तन्त्राश का इनाम जीता है। है न बढ़िया? अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।

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18.2.08

ट्विटियाहट

जीतू और अमित ने ट्विटियाना शुरू किया - देबू, श्रीश और दिनेश ने भी। ट्विटर का अन्तरापृष्ठ तो हिन्दी में नहीं है पर सन्देशों में यूटीऍफ़ ८ दनादन चलता है, यानी हिन्दी सन्देश पढ़े लिखे जा सकते हैं। आज से मेरी ट्विटियाहट नौ दो ग्यारह पर दाईं तरफ़ भी आपको दिखती रहेगी। यानी कभी नहीं होऊँगा नौ दो ग्यारह!

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15.2.08

फ़ायर्फ़ाक्स ३.० में देवनागरी सुधरी - दोसौदो तीनसौ इक्यावन - बिरगिट मीठी है!

फ़ायर्फाक्स की दोसौदो तीनसौ इक्यावन वाली बीमारी अब ठीक हो गई है। बीमारी यह थी, और उसके अलावा दो और भी। पर इसके लिए आपको फ़ायर्फ़ाक्स ३.० उतारना होगा, जो कि बिरगिट मीठी करेगा! खत्म हुई दो सौ दो तीन सौ इक्यावन, बावन, चौवनग्रीज़्मंकी की नास्त्यावश्यकता। बधाई मुझे न देना, मैं सिर्फ़ ब्यौरा दे के नौ दो ग्यारह हो गया था, वह भी कुछ चार साल पहले। उम्मीद है कि अगले चार साल में ब्लॉगर मुखपृष्ठ भी सुधर जाएगा!

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12.2.08

मेरे फ़ोन में हिन्दी नहीं, कोई गल नहीं। पीसी में तो है न? भेजो समोसे दनादन

हिन्दी में समोसे भेजने के लिए ज़रूरी नहीं कि फ़ोन में हिन्दी हो, न ही पढ़ने के लिए। मेरे नोकिया ६२६० में हिन्दी नहीं है, पर पीसी पर नोकिया पीसी स्यूट लगाया, फ़ोन को सी ए ५३ केबल से जोड़ा, और पहले सन्देश लिखा - मोबाइल से नहीं, पी सी से - नोकिया हिन्दी सन्देश प्रेषण - १ फिर समोसा भेजा - नोकिया हिन्दी सन्देश प्रेषण - २ समोसा पहुँचा दिया गया - नोकिया हिन्दी सन्देश प्रेषण - ३ क्योंकि समोसा मैंने भेजा तो खुद ही को था, इसलिए टूँ टूँ आ गई एक सेकिंड बाद। तो हमने समोसे के लिए हाथ बढ़ाया, समोसा मिला और पूरा का पूरा हिन्दी में मिला! सन्देश पठन सन्देश पूर्वावलोकन जबकि फ़ोन को न हिन्दी के समोसे बनाना आता है, न खाना - सिर्फ़ डब्बे ही दिखते हैं फ़ोन में। केबल नहीं हो तो पीसी और फ़ोन दोनो में नीलदन्त हो तो भी चलेगा! इस सब को करने के लिए जी पी आर ऍस की भी ज़रूरत नहीं है। यानी भले ही हिन्दी फ़ोन पर नहीं दिखे, केबल या नीले दाँत तो आप उसमें गाड़ ही सकते हैं! जब तक रहेगा नोकिया का केबल, समोसे में रहेगी हिन्दी। (तुक नहीं मिली, इसलिए होता हूँ नौ दो ग्यारह।)

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22:44 बजे आलोक द्वारा।
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10.2.08

मोबाइल जाल - एक जानदार सवारी, एक शानदार सवारी

सरपट दौड़ने वाला ब्रोडबैंड शादी की उस दावत की तरह ही है जिसमें पकवान इतने ज़्यादा और इतनी मात्रा में होते हैं कि इंसान आधा सामान थाली में रख नहीं पाता और बाकी आधा थाली में ले के भी फेंक ही देता है। उसके मुकाबले डायलप - की कल्पना करना ही थोड़ा मुश्किल होता है - हॉस्टल में महीने के उन आखिरी दिनों की तरह जब मेस किसी कारण से बन्द हो जाती थी और पिताजी की ओर से आठ सौ रुपए के ड्राफ़्ट की प्रतीक्षा रहती थी। जो लोग आईआईटी आदि से पढ़े हैं उन्हें इस बात की कल्पना कर पाना थोड़ा मुश्किल होगा, लेकिन मेरे कॉलेज के हॉस्टल की मेस में कभी कभार ऐसा हो जाता था। पर अब ब्रोडबैंड के सरपट घोड़े से उतरना पड़ा है, क्योंकि मेरे गाँव ढकोली में इस समय तार वाले फ़ोन हैं नहीं, अलबत्ता मोबाइल खूब हैं। तो मैं चला बैलगाड़ियों की खोज में। खोजबीन करने के बाद संक्षेप में बताता हूँ कि क्या जोड़तोड़ करने पड़े।
  1. एयरटेल से जी पी आर ऍस सुविधा ली। एयर्टेल शिमला के उच्चाधिकारी सुदीप जी को इसके लिए धन्यवाद।
  2. सुविधा लेने के बाद 52567 पर Mo लिख कर समोसा भेज के जी पी आर ऍस का जमाव स्थापित किया
  3. अपने नोकिया 1100 को ताक पर रख के धर्मपत्नी जी का नोकिया 6260 हथियाया, और उसमें "डिफ़ॉल्ट ऍक्सेस पॉइंट" "मोबाइल ऑफ़िस" किया।
  4. मोबाइल चिट्ठाजगत खोल के देखा। खुल गया, लेकिन डब्बे दिखे। मोबाइल चिट्ठाजगत - रोमन तो फिर भी ठीक चल रहा था। यानी कि जाल से जुड़ तो गया, पर हिन्दी वाले काम नहीं हो सकते थे।
  5. नोकिया के जालस्थल से नोकिया पीसी स्यूट 6.85.14.1 उतारा। यह काम दफ़्तर से किया क्योंकि घर पर तो अन्तर्जाल था ही नहीं, यूऍसबी अँगूठी में ले के आया कुछ 26 मेगाबाइट का है।
  6. उसे स्थापित किया। नोकिया पीसी स्यूट
  7. नोकिया 6260 के लिए सीए-53 यूएसबी केबल ले के आया, पंचकूला से, जो कि 1580 रुपए की मिली। एक और केबल इसके लिए उपयुक्त है, डी के यू - 2, लेकिन वह दुकान पर था नहीं।
  8. केबल के जरिए फ़ोन को पीसी से जोड़ा।
  9. नोकिया पीसी स्यूट में मौजूद "कनेक्ट टु इंटर्नेट" पर चटका लगाया, और स्वचालित जमाव में एयर्टेल इंडिया चुना। एयर्टेल जी पी आर ऍस
  10. जोड़ा।
  11. जुड़ गया। मोबाइल से जाल जुड़ गया
  12. यह प्रविष्टि लिखी
अब हम होते हैं नौ दो... नहीं अभी नही। कुछ और सवाल जो मेरे मन में हैं और आपके मन में भी होंगे शायद।
  1. कुल जमा ज़रूरतें थीं - जी पी आर ऍस वाला फ़ोन, जी पी आर ऍस सुविधा, नोकिया पीसी स्यूट, केबल अनिवार्य नहीं है, चाहें तो नीलदंत से भी जोड़ सकते हैं, पर फिर ऊपर लिखा 460.8, 110 हो जाता है।
  2. बी ऍस ऍन ऍल के जी पी आर ऍस का जमाव कैसे करते हैं मुझे नहीं पता है। आपको पता हो तो बताएँ।
  3. नोकिया के अलावा अन्य फ़ोनों के बारे में मेरा अनुभव नहीं है, आपको हो तो बताएँ
  4. हिन्दी + जी पी आर ऍस की सुविधा वाले मोबाइल फ़ोन हैं नोकिया 3110सी, और नोकिया 6085। और भी हैं, पर सबसे सस्ते यही हैं। 6085 केवल 4800 रुपए का है, 3110सी उससे भी थोड़ा कम ही है।
  5. किसी भी एस 60 फ़ोन यानी नोकिया ई सीरीज़ या ऍन सीरीज़ - में हिन्दी नहीं है।
  6. नोकिया 3110सी का केबल, सीरियल केबल है, जो कि नोकिया 6260 के केबल से सस्ता है।
  7. पंचकूला में 11 सेक्टर की नोकिया की दुकान के दरबान तक को भी फ़ोनों के बारे में इतनी जानकारी है कि नोकिया के शोरूम के प्रशिक्षित कर्मचारियों को शर्मिंदा कर दे। उन्हें धन्यवाद।
  8. जी पी आर ऍस का खर्चा कितना आएगा, पता नहीं, महीने के अन्त में ही मालूम चलेगा। आपको पता हो तो बताएँ।
  9. सेब और लिनक्स के लिए जमाव अभी नहीं किया है, बाकी है।
  10. नोकिया, एयर्टेल, बी ऍस ऍन ऍल - किसी का भी जालस्थल हिन्दी में नहीं है। न ही नोकिया पीसी स्यूट हिन्दी में है।
अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह :)

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14:28 बजे आलोक द्वारा।
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6.2.08

सी ऍस ऍस से मत डरो, उसके आगे बढ़ो

कई साल पुरानी बात है, देबू ने मुझे कुछ फ़ोकट के खाके दिखाए थे और कहा था कि देवनागरी.नेट की कुछ हालत सुधारो, थोड़ा सुन्दर बनाओ उसे। मैंने नहीं किया, ऊपरी ओर से तो यही कह के कि सामग्री ज़्यादा ज़रूरी है, पर सच तो यह है कि सी ऍस ऍस से डर लगता था, पर अभी अन्ततः कुछ सी ऍस ऍस करने के बाद लगा कि पहले ही यह काम करता तो बहुत मेहनत बचती। नई सामग्री जोड़ने में भी डर लगता था, क्योंकि सभी पन्ने एक जैसे रखना ज़रूरी था। यह डर कुछ वैसा ही था जैसा कि इंस्क्रिप्ट सीखने के पहले हिन्दी लिखने में लगता था, पर उसके बाद आसानी से ज़्यादा और सही लिखना शुरू हुआ। वही चीज़ अब सी ऍस ऍस के साथ है। अब नए पन्ने जोड़ना काफ़ी आसान हो गया है, पर चक्कर यही है कि आजकल ब्रोडबैंड ठप्प है, इसलिए काम और आगे नहीं बढ़ पा रहा है वरना हर रोज एक नया पन्ना जोड़ने का तो इरादा था ही। इसीलिए कहते हैं, माउण्टेन ड्यू पियो, आगे बढ़ो। और चीज़ें जिनसे फ़िलहाल डर लगता है - जय हो सी ऍस ऍस की, और जय हो सी ऍस ऍस पुष्टिकर्ता की।

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16:37 बजे आलोक द्वारा।
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5.2.08

जीपीआरएस - हिन्दी में मोबाइल जाल - कौन सा फ़ोन?

जीपीआरएस के जरिए अंतर्जाल तक आपमें से कई लोग जुड़ते होंगे, यह बताइए कि हिन्दी के जालस्थलों को मोबाइल से देखने के लिए अच्छा हैंडसेट कौन सा है? जगदीश जी ने बताया कि वे नोकिया ३११०सी का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा शायद नोकिया ६२८० और शायद ६२७० में भी यह सुविधा है, यह बताइए कि आपके क्या अनुभव हैं? पूछ रहा हूँ क्योंकि अभी घर से ब्रोडबैंड नौ दो ग्यारह है, और तरीके खोज रहा हूँ।

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19:53 बजे आलोक द्वारा।
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27.1.08

सेब पर देवनागरी

सेब का इस्तेमाल तो करीब छः महीने से कर रहा हूँ, पर उसके बारे में अभी तक जानकारी में बदलाव नहीं किया था। सराय के रविकांत जी के दबाव का ही फल है कि यह पृष्ठ परिष्कृत हुआ। उन्हें धन्यवाद, यदि आप सेब खाते हैं तो अपनी टिप्पणी दें, और क्या जुड़ना चाहिए, अब मैं होता हूँ नौ दो ग्यारह।

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18:33 बजे आलोक द्वारा।
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4.1.08

२००८ के शुरू में देश में कुल २६ लाख ७० हज़ार ब्रॉडबैंड प्रयोक्ता

बिज़नेस स्टैंडर्ड बता रहा है कि भारत में २००८ के शुरू में कुल २६ लाख ७० हजा़र लोगों के पास ब्रॉडबैंड है। यानी हज़ार लोगों में से ३ के पास। कितना सौभाग्यशाली हूँ मैं। सरकार का लक्ष्य था २००८ के अन्त तक ९० लाख लोगों तक ब्रॉडबैंड पहुँचाना, यानी १००० में से ९ के पास। बहुत महत्वाकाङ्क्षी तो नहीं था लेकिन लक्ष्य का तिहाई से कम हासिल हुआ। साथ ही टीआरएआई ने यह भी कहा है कि ब्रॉडबैंड का मतलब है कम से कम २५६ केबीपीएस [पीडीएफ़, अंग्रेज़ी] की गति। यानी प्रति कनेक्शन करीब ३२ केबीपीएस की गारंटी। देखते हैं २००८ में क्या होता है।

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13:28 बजे आलोक द्वारा।
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3.1.08

शक्राणुओं से बनेंगे रोबोट

ताज़ी खबर! शक्राणुओं अपनी पूँछों के जरिए एक घंटे में २१ सेंटीमीटर चल सकते हैं, शक्राणुओं के आकार के हिसाब से यह बहुत तेज़ गति है। अतः अब चुन्ने मुन्ने रोबोटों को चलाने के लिए इनसे काम लिया जा सकेगा। पर मतलब यह नहीं है कि जब भी भविष्य में घर में रोबोट चलाने होंगे तो आपको इकसठ बासठ करना पड़ेगा, शायद चूहों के शक्राणुओं को दुहा जाए।

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18:12 बजे आलोक द्वारा।
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8.12.07

माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस ऑन्लाइन

माइक्रोसॉफ़्ट वाले आपका ऑफ़िस ऑन्लाइन में स्वागत कर रहे हैं, वह भी निःशुल्क, और वह भी हिन्दी में। पता चला कि माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस के सात अलग अलग संस्करण हैं, जेब के भार के आधार पर। सहायता और नुस्खे, और थोड़ा बहुत फ़ोकट का माल भी है, पर उतना नहीं जितना ओपन ऑफ़िस में, पर उसके बारे में मुक्त तंत्रांश दिवस पर।

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07:45 बजे आलोक द्वारा।
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7.12.07

(अरब स्वता) || (अरब्स वता)

मुझे नहीं पता था की अरबियों में जीभ बाहर निकालना भी लड़कियों को छेड़ने के तरीकों में गिना जाता है। आँख मारना, सीटी बजाना, आदि तो ठीक है, पर जीभ निकालने का काम तो बच्चे ही करते हैं अपने यहाँ, छेड़छाड़ की भाषा में तो नहीं गिना जाता है। एक बात और, अरबी फ़ारसी जानने वाले लोग उन शब्दों की देवनागरी की वर्तनियाँ भी अलग तरह से लिखते हैं, जिससे पता चलता है कि वास्तव में वह शब्द अरबी या नस्तलीक़ में कैसे लिखे जाते हैं। महकता आंचल नामक मासिक पत्रिका में भी अकसर कुरआन, आयना जैसी वर्तनियाँ नज़र आती हैं। वैसे यह अनुवाद दिलचस्प लगा मुझे। कोई अरबी नवीस या अरब निवासी बता सकते हैं कि स्वता मतलब क्या होता है? शायद यह अरब स्वता नहीं, अरब्स वता है।

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17:53 बजे आलोक द्वारा।
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3.12.07

हिन्दी का एक और डिग

पहले एक हिन्दी के डिग की चर्चा हुई थी, पर लगता है वह डिग अभी गड्ढे खोद खोद कर उन्हीं में सो रहा है। आज एक और मिला, वह है हिन्दी पेपर। बढ़िया है। सारे कोने वेब-२ वाले गोल गोल हैं!

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15:21 बजे आलोक द्वारा।
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15.11.07

आगे बिल्लू, पीछे सेब

खबर यह है कि बिल्लू सेब को नहीं खा रहा, बल्कि सेब आगे दौड़ रहा है और बिल्लू पीछे। जापान में पिछले महीने, यानी अक्तूबर २००७ में ५४% सेब बिके हैं। यानी नए कंप्यूटर खरीदने वाले आधे से ज़्यादा वहाँ सेब खा रहे हैं। इससे कई बाते सामने आईं -
  1. जापानियों के पास बहुत पैसा है।
  2. जापानी लोग ओम शांति ओम, साँवरिया जैसी सड़ी फ़िल्मों के बजाय वास्तव में कलात्मक चीज़ें पसंद करते हैं
  3. यह खबर सुन कर ब्लॉगर इतना खुश हुआ कि हिंदी की तारीखें भूल गया। ब्लॉगर-हिंदी-त्रुटि बदल कर जापानी करनी पड़ी, सेटिंग्स -> प्रारूपण में जा कर। ब्लॉगर-जापानी
पर लाख बात की एक बात। बिल्ली से तेज़ तो तेंदुआ ही भागेगा न। तभी तो अक्तूबर में बिके कुल कंप्यूटरों में से १०० में ५४ तेंदुए ही बिके जापान में, मत्सु जी आजकल नौ दो ग्यारह हैं पर बिल्लू को पीटने पर उनको बधाई।

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18:43 बजे आलोक द्वारा।
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