मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह

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1.11.07

दावा

Review My Blog at HindiBlogs.org बस यही नहीं समझ आता कि अपनी ही चीज़ के लिए बार बार दावा क्यों ठोंकना पड़ता है। वैसे हिंदी ब्लॉग्स की शक्लोसूरत इतनी बढ़िया है कि नौ दो ग्यारह होने का मन ही नहीं करता। मैं वहाँ कम से कम २० मिनट तो बिता ही चुका हूँ। बस ऊपर तस्वीर में जो लिखा है वह हिंदी में होता तो मज़ा आ जाता।

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20:21 बजे आलोक द्वारा।
6 छींटाकसी
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