यह गपशप irc.freenode.net पर होगी, #indlinux पर। चर्चा के विषय वही होंगे जो आमतौर पर
इण्डलिनक्स में होती है, बस डाक के बजाय थोड़ी और तुरत फुरत।
यदि आपको यह न पता हो कि आईआरसी क्या होता है, तो यह ऍचटीटीपी या ऍफ़टीपी की तरह का ही एक और
शगूफ़ा है। बंगलोर में पहली बार देखा था - कई साइबर कैफ़ों में रहता था। आजकल नौ दो ग्यारह हो चला है।
आईआरसी के यूआरएल भी होता हैं, जो कि irc:// से शुरू होते हैं। जैसे ऍचटीटीपी मूलतः ८० का इस्तेमाल करता है, वैसे ही आईआरसी ६६६७ का इस्तेमाल करता है। और हाँ, इसमें से अधिकतर जानकारी यह लेख लिखने के पहले मुझे भी नहीं थी।
विंडोज़ के जरिए शामिल होना चाहें तो
ऍमआईआरसी का इस्तेमाल करें,
लिनक्स के जरिए शामिल होना चाहें तो
ऍक्स-चैट का इस्तेमाल करें, और
सेब के जरिए, पता नहीं, कभी आजमाया नहीं। कल आजमाता हूँ।
तो मिलते हैं,
irc://irc.freenode.net#indlinux पर, रात नौ से ग्यारह हिंदुस्तानी समयानुसार।
Labels: तकनीकी, लिनक्स, संगणक
16:38 बजे आलोक द्वारा।
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यूँ तो मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ पर कभी वहाँ रहा नहीं, इसलिए
शीरमाल और बाकी रोटियों के बारे में कुछ खबर न थी। अगली बार जाने पर हाथ साफ़ करने हैं। वैसे
टिप्पणी कूट के आधार पर एक अच्छा खासा विजेट बन सकता है।
वैसे पैंगो या गार्गी, पता नहीं किसमें, यह त्रुटि मिली है कि सन्देश को स्नदेश की तरह दिखाता है।
त्रुटि की पहली छवि
त्रुटि की दूसरी छवि
पिछले आठ घंटे की प्रविष्टियों पर टिप्पणी करने में पूरे दो घंटे लगे। दाद देता हूँ
समीर लाल जी को, और होता हूँ नौ दो ग्यारह।
Labels: उपकरण, लिनक्स
05:27 बजे आलोक द्वारा।
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