मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह

Can't see Hindi?

Why can't I see the Hindi section?

30.11.04

अक्षरग्राम का नया नाम

क्यूँकि अक्षरग्राम नाम थोड़ा फेंकू है, पङ्कज जी चाहते हैं कि कोई और नाम दिया जाए उसे। पर नाम क्या रखा जाए? नुक्कड़? पान की दुकान? चौपाल? - इस नाम का स्थल पहले ही है शायद गप्पोड़ी ? फ़ट्टेबाज़ ? दिमाग और काम नहीं कर रहा है। और सोचेंगे। इस बीच पता चला है कि आन्ध्र प्रदेश में डिजिटल सर्टिफ़िकेट मिलने वाले थे। लेकिन पता नहीं तेलुगु देसम की शिकस्त के बाद इसका क्या हश्र होगा।
06:33 बजे आलोक द्वारा।
1 छींटाकसी
इस लेख के हवाले
29.11.04

देननागरी की दो और मुद्रलिपियाँ

शुक्रिया आसिफ़ जी।

गुरुमाँ गुरुमाँ मुद्रलिपि

ओशो ओशो मुद्रलिपि

यह दोनो आम सार्वजनिक अनुमति पत्र - जी पी ऍल के तहत उपलब्ध हैं। तुलना करें, तो इन मुद्रलिपियों के बारे में आपके क्या विचार हैं?
11:00 बजे आलोक द्वारा।
0 छींटाकसी
इस लेख के हवाले
28.11.04

तेलुगु के पन्द्रह चिट्ठे

जी हाँ, पन्द्रह। हिन्दी के भी इतने के ही आसपास होंगे। मानना पड़ेगा। किरण से में ब्लग बङ्गलोर में मिला था, कुछ दो साल पहले। नमस्ते। फिर भेंट हो शीघ्र ही, ऐसी उम्मीद है। आजकल माइक्रोसॉफ़्ट में हैं, सम्भवतः हैदराबाद में?
20:26 बजे आलोक द्वारा।
1 छींटाकसी
इस लेख के हवाले

पिछले लेख:

बासी माल:


Home © Alok Kumar alok at devanaagarii dot net, 2002-2008, सीऍसऍस © डब्ल्यू ३ सी .

Valid XHTML 1.0 Strict Valid CSS!

Google

मुख