मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह

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23.1.05

प्रतिभास

अनुनाद। पहले नहीं सुना था यह नाम। स्वागतम्।
21:53 बजे आलोक द्वारा।
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18.1.05

सरकारी नौकरियाँ बाङ्गलादेशियों को

फ़र्ज़ कीजिए कि हिन्दुस्तान के किसी अख़बार में कोई ऐसी ख़बर आए तो कैसा हाहाकार मच जाए। वही अमरीकियों ने किया है तो ताज्जुब की क्या बात है?
21:51 बजे आलोक द्वारा।
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17.1.05

हालाँकि क्या?

कुछ समझ नहीं आया, पर रूसी के अक्षर अच्छे हैं। कोई बता सकता है कि हालाँकि С уважением. का मतबल क्या है?
21:06 बजे आलोक द्वारा।
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16.1.05

ई-लेखा

कहते हैं कि ये इनका दूसरा प्रयास है। तो पहला कौन सा था? खुलासा करें। वैसे इन जीवित प्राणी को हम असली दुनिया में पहले ही जानते थे और चिट्ठे की मदद से अब और जानेंगे। स्वागत है मित्र। आशा है जल्द ही भेंट होगी। उम्मीद है कि उँगलियाँ खटखटाते रहेंगे। यानी कि कुञ्जीपटल पर। :)
15:33 बजे आलोक द्वारा।
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12.1.05

मनोगत

पण आस्वाद काय होत आहे?
16:12 बजे आलोक द्वारा।
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8.1.05

ईचर्चा

एक और गपोड़ियों का अड्डा।
09:36 बजे आलोक द्वारा।
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5.1.05

आई आई टी रुड़की

यह सुनके लगता है कि दो अलग अलग जगहों के नाम लिए जा रहे हों। पर क्या करें पुराने ज़माने का जो हो रहा हूँ। अभी से कुछ दस साल पहले रुड़की गया था - कुछ इम्तिहान देने, और फिर वहाँ से नौ दो ग्यारह हो गया।
20:45 बजे आलोक द्वारा।
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2.1.05

हिन्दुस्तान का तलुआ

जनाब इयुजिन डी बोएर को हिन्दुस्तान अलग लगा, और अच्छा लगा। होता है ऐसा, जब इंसान किसी नई जगह जाता है, और नई चीज़ देखता है। यहाँ फ़िलिपींस में मुझे इस बात से अचरज होता है कि लोग कितनी आसानी से, हमेशा हँसते रहते हैं, और विदेशियों को देख के आपस में खुसर फुसर नहीं शरू करने लगते। इयुजिन जी को शुभकामनाएँ।
17:56 बजे आलोक द्वारा।
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