रंग दे बसंती देख ली, देशभक्ति का नया उद्धरण है, पुरानी वाली और नई वाली के बीच टाँका भिड़ाने का सफल प्रयास । क्या कहने।
कई दिनों से नौ दो ग्यारह था। इस दुनिया में दिन सालों के बराबर होते हैं, ऐसा देबाशीष ने कहा था। मुझे भी वही महसूस हो रहा है।
18:44 बजे आलोक द्वारा।
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