हिमांशु का कहना है कि फ़ायर्फ़ाक्स पर उन्हें हिन्दी ठीक से नहीं दिखतीं। मेरी जानकारी में इसके पाँच कारण हो सकते हैं।
(1) विण्डोज़ 2000 या विण्डोज़ ऍक्स पी का न होना
(2) (1) तो है पर भारतीय भाषाओं का पॅक स्थापित नहीं किया है।
(3) फ़ायर्फ़ाक्स पर सही मुद्रलिपि का चुनाव न करना - Tools -> Options -> Content -> Fonts & Colors -> Advanced -> Fonts For -> Devanagari के अन्तर्गत।
(4) मोज़िला
त्रुटि 202351 की वजह से - justify वाली
(5) कभी कभी संयुक्ताक्षर हलन्त समेत दिखते हैं - ऐसा केवल कुछ ख़ास आई ऍम ई का प्रयोग करते समय होता है जो कि ZWJ व ZWNJ बीच में डाल देते हैं जो कि मोज़िला सँभाल नहीं पाता। जो लोग ऐसे आई ऍम ई से बने पन्नों को देखेंगे, उन्हें मोज़िला में हमेशा ही देवनागरी टूटी फूटी दिखेगी।
त्रुटि 202352
(1), (2), (3) से तो निपटा जा सकता है, (4) की वजह से लोगों ने justify का इस्तेमाल ही बन्द कर दिया है, हिन्दुस्तानी जो ठहरे, ऍड्जस्ट हो जाते हैं - इस त्रुटि को ठीक करने के बजाय।
(5) एक समस्या है क्योंकि इस आई ऍम ई का प्रयोग करके लोग इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर में देखते हैं कि सब ठीक दिख रहा है, लेकिन मोज़िला मट्टी पलीद कर ही देता है।
तो ये, समाधान नहीं था, समस्या का विश्लेषण ही था। विश्लेषण लायक कोई और जानकारी हो तो बताएँ।
बहरहाल देवनागरी सम्बन्धी मोज़िला की सारी त्रुटियाँ आपको
देवनागरी की बग्ज़िला में खोज करने से मिलेंगी।
12:03 बजे आलोक द्वारा।
10 छींटाकसी
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देवनागरी डॉट नेट पर मैंने पिछले साल की शुरुआत में, यानी कि जनवरी में
ऍड्सेंस विज्ञापन डालने शुरू किए थे। सौ डॉलर के आँकड़े पर पहुँचने में ग्यारह महीने लगे। मतलब कि लगभग 4500 रुपए।
एक तरह से देखा जाए तो जालस्थल पर हुए सालाना खर्चे से ये ज़्यादा है - आतिथ्य व डोमेन का सालाना खर्चा 1190 रुपए है। यानी कि लागत पर लाभ, 278%।
लेकिन ये गणित ठीक इसलिए नहीं है क्योंकि इसमें उन घण्टों का हिसाब नहीं है जो मैंने स्थल को सजाने सँवारने में लगाए हैं। न ही खर्च हुई बिजली, फ़ोन के बिल(8400 सालाना न्यूनतम) का। वो सब मिला लें तो अब तक घाटे में ही चल रहे हैं।
पर एक अच्छी शुरुआत है।
आपके क्या अनुभव हैं ऐडसेंस या
ऍडवर्ड्स के साथ?
12:52 बजे आलोक द्वारा।
7 छींटाकसी
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